आपकी मुस्कुराहट भी हमसे कुछ कहती है

आपकी मुस्कुराहट भी हमसे कुछ कहती है
खुबसुरती आपके रग-रग में दिखती है
वफा ए मुहब्बत की बेमिशाल मुरत हो आप
आप ना सही मगर आपकी नजरें ये बयाँ करती है ।

अब तो बस जहाँ देखुँ तेरा ही चेहरा रहता है

हर लम्हा मेरे आसपास तेरी यादोँ का पहरा रहता है
ये वक्त भी ना जाने अब कहाँ ठहरा रहता है
ना रात को करार है ना दिन को सकून है
अब तो बस जहाँ देखुँ तेरा ही चेहरा रहता है ।

हमसफर अच्छा हो तो राह कैसी भी हो गुजर जाती है

हमसफर अच्छी हो तो राह कैसी भी हो
गुजर जाती है ।
मुहब्बत की राह में कोई मिलता है तो
कोई साथ छोङ जाती है ।
हर किसी को यहाँ नहीं मिलता मुहब्बत में
साथ देने वाला
मुहब्बत में कोई लुटता है और कोई किसी को
आबाद कर जाती है ।

तुझसे मिलने को तो अब मेरा दिल बेकरार है

वो कहती है ए दिल क्योँ तुने मुहब्बत की
कभी जो तुने ना किया क्योँ ऐसी शरारत की
नहीँ लगता कहीँ भी दिल अब बिना उनके
मुझसे बिना पुछे कैसे तुने ये जुर्रत की
मैँ कहता हुँ क्योँ कहती हो तुम इस पागल दिल को
ये दिल तो अभी नादान है कैसे बतलाऊँ तुझ को
हाल मेरा वही है जो तुम्हारा हाल है
तुझसे मिलने को तो अब मेरा दिल बेकरार है ।

वफा-ए-मुहब्बत हम ना करते तो क्या करते

वफा-ए-मुहब्बत हम ना करते तो क्या करते
उसकी यादोँ मेँ छुप-छुप कर ना रोते तो क्या करते
उसने तो एक लफ्ज मेँ कह दिया भुल जा मुझे
हम जख्म-ए-दिल ना दिखाते तो क्या करते

मेरा खुन-ए-दिल माँग लो

मेरी मुहब्बत का युँ इम्तहान ना लो
मुहब्बत है तु मेरी बस ये जान लो
नहीँ आता मुझे तेरी मुहब्बत के सिवा कुछ भी
गर यकीँ ना हो तो मेरा खुन-ए-दिल माँग लो

इश्क मे मैने ये कैसी ठोकर पाई

इश्क में मैने ये कैसी ठोकर पाई
की थी मुहब्बत और मिली बेवफाई
ए खुदा अगर अंजाम ए ईश्क ये था
तो क्यों लिखी मेरे किस्मत मे मुहब्बत और फिर जुदाई

हम जख्म-ए-दिल ना दिखाते तो क्या करते

वफा-ए-मुहब्बत हम ना करते तो क्या करते
उसकी यादोँ मेँ छुप-छुप कर ना रोते तो क्या करते
उसने तो एक लफ्ज मेँ कह दिया भुल जा मुझे
हम जख्म-ए-दिल ना दिखाते तो क्या करते