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Showing posts from October, 2015Show All
तेरी खुबसुरती का ये फसाना हुआ
बेबसी ने मुझे इस कदर सताया है
मंजिल वही रहती है बस सफर बदल जाते हैं
तमन्ना होती है तुम्हें हमसफर बना लुँ
साँसो का क्या भरोसा ये तो टुट जाते है
चाहत मे तेरी मै जिंदगी सँवार दुँ
मेरे लफ्जों में  तेरे सिवा कोई नाम ना हो
कितनी मुहब्बत तुमसे है ये मै नही जानता
वो नटखट जमाने मुझे आज भी याद हैं
वरना आन पर जिस दिन आ पङे नामो निशान मिटाने वाले हैं
क्यों मैनें भी किसी बेवफा से दिल को लगाया