परवाने है हम जलने का हुनर रखते है


कितने भी जख्म दे दे तु काँटे ,
मेरे इरादे को तुम बदल नहींं सकते।
मेरी पसंद तो गुलाब है.
इसे तुम मुझसे छिन नहींं सकते।।
कैसे बताउँ चाहत की खबर दुनिया वाले से,
ये हैंं कि मुहब्बत करने वाले को जीने नही देते ।
इजहार ए मुहब्बत तो नैनोंं से की थी हमने ,
मगर ये अश्क नैनों से रुकने नहींं देते ।।
समझा दो खुदा तुम जमाने वाले को ,
हम आशिक हैंं किसी के रोके रुक नहीं सकते ।
लाख आजमा ले रंजिश ए ईश्क
हम जख्म सह लेंगे मगर झुक नहींं सकते ।।
कोई क्या डराएगा मुहब्बत करने वाले को ,
हम तो दिवाने है डर नहींं सकते।
लोग कहते हैंं जुदाई के गम मे जलोगे तुम दोनो,
इन्हे बता दो परवाने है हम जलने का हुनर रखते है ।।
जमाना क्या मिटाएगी हम मुहब्बत करने वाले को,
ईश्क मे हम साथ जिने मरने का भी हूनर रखते हैं ।।
प्रेषक :- सुब्रत आनंद

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