Sunday, 22 September 2019

गुरुदेव के चरणों में...

पहले गुरु माता- पिता, वंदन शीश झुकाय।
बिन इनके संभव नहीं, जीवन सुख है पाय।।

नमन उन्हें जो दे गए, जीवन का हर मर्म ।
चलूँ सदा मैं नेक पथ, करूँ नेक मैं कर्म।।

भले कठिन हो राह पर, करते वो आसान ।
ईश तुल्य गुरु हैं सुनो, हरदम रखना मान..!!


Saturday, 21 September 2019

कुछ दोहे...

सपने होते सच वही, दिखें जो खुली आँख
पंछी उड़ते तब तलक, जब तक रहते पाँख...!!

बचपन के वो दिन कहाँ, बस उसकी है याद
वो गाँव की मस्तियाँ, मिली न उसके बाद...!!

नहीं शहर भाता मुझे, भूला सका न गाँव
वो अल्हड़ अठखेलियाँ, वो बरगद का छाँव...!!

फ़ीकी है मुस्कान अब, फ़ीकी जग की रीत
ले चलो कहीं दूर अब, मुझको मेरे मीत..!!

Thursday, 19 September 2019

वेदना किससे कहें..?

नैनों में चुभने लगा, जैसे कोई तीर
कैसे किसको हम कहें, अपने मन की पीर..!!

जीवन के हर मोड़ पर, दोगे मेरा साथ
फिर क्यों तूने थाम ली, अब दूजे का हाथ..?

रोग लगा कर प्रेम का, नहीं निभाई प्रीत
कहता मेरा मन सदा,  कैसी जग की रीत...?

सब कुछ तुझपर वार कर, करना चाहा प्यार
दिल से दिल के खेल में , मिली मुझे बस हार।

टूटा मेरा ख़्वाब था, बिखरी थी हर आस
अब न होगी फिर कभी, भूले भी विश्वास..!!
© सुब्रत आनंद....(स्वरचित)